नया नजरिया, नयी सोच

शनिवार, फ़रवरी 17

मुलाक़ात एक छोटी सी कहानी

पहले ये बता दूँ ये फिल्मी नहीं है तो इत्तेफाक वाली चीज़ नहीं होनी है और जरुरी बात ये प्यार वाली कहानी है तो जज्बातों की क़द्र कीजियेगा |

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पहली दफा

Mulaqat By Amit Pandey part one pahali dafa
पहली दफा
शुरू करते हैं
यूँ तो सभी वैलेंटाइन मनाने में मशगूल थे, तो हम बेचारे सिंगल लोग इसके गुजरने का इंतज़ार कर रहे थे | कसम से ये 10 दिन बहुत ही ज्यादा टॉर्चर करते हैं और ऊपर से ऑटो, घाट, रेस्टोरेंट में पैर रखने की जगह ढूढना भी मुश्किल! तो मैं निकल पड़ा, अकेले ही मंदिर की ओर| अरे गलत मत समझिये मै तो बस शांति की तलाश में निकला था, दशाश्वमेध घाट की ओर, उस दिन कुछ ज्यादा ही चहल पहल थी और बैरीकेड भी लगे थे जाहिर है, शिवरात्री की तैयारी जोरों पर थी|   

फिर भी आगे बढ़ रहा था, तभी मेरी नज़र एक लड़की से मिली हां भाई ! वो दूकानदार से बिल मांग रही थी शायद! इतनी मासूमियत, कैट आई चश्मा ब्लैक फ्रेम में, और माथे पर बिंदी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी | बस इतना ही याद रहा मुझे!
कि अचानक से किसी ने मुझे धक्का दिया और मै नीचे गिर गया था और मेरी नज़रे क्या हटी वो तो गायब ही हो गयी | कसम से जिसने भी धक्का दिया वो किसी ज़माने में क्रूर ही रहा होगा, मैं उसे ढूंढने के लिए भागा| कम से कम बात ना सही देख तो लूँगा लेकिन अब कहाँ मिलेगी? जो कहते है की ढूढने से भगवान भी मिल जायेंगे, मेरे सामने आयें तो बताऊ |

                                        “किसकी तलाश में था तू  कब से    
भूल आया है आज तू अपना थैला उसके दर पे"

खैर अब मेरी बत्ती गुल हो गयी थी, क्या करें भोले बाबा ने एक ही चीज़ दी थी! मनमौजी, आज वो भी चली गयी | उस रोज़ पहली बार पंखे पर लगी धूल, मिटटी दिखाई दी थी| जब नीद नहीं आ रही थी तो बेहतर था थोडा ठंडी हवा ले लूँ | रात के दो बजे मैं छत पर गया, चांदनी रात, और आश्चर्य हो रहा था की आसमाँ इतना जगमगा क्यू रहा था? अद्भुत इतनी खुबसूरत रात ! दूर दूर तक ये नज़ारा और असीम शांति | मैंने चाँद की एक झलक ली और फिर यूँ खोया की सूरज की पहली किरण के साथ आँख खुली |   

अब बताओ ये जो पहली बार हुआ है, उन्हें ढूंढेगा कैसे ? क्या कोई इत्तेफाक़ होगा? हालाँकि इत्तेफाक़ जैसी चींजे फिल्मों में ज्यादा होती है तो आगे क्या होगा?
जल्द ही पोस्ट करता हूँ, अमित पाण्डेय की लिखी कहानी है जारी रहेगी ...

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