नया नजरिया, नयी सोच

रविवार, नवंबर 12

आपकी कहानी, मेरी जुबानी



हर किसी की एक कहानी होती है, कुछ दिलचस्प तो कुछ बस आम कहानी से मिलती जुलती है| लगभग ७०% कहानियाँ एक दूसरे की मिलती जुलती है और बचे हुए 30% के रोमांच को सभी जानना चाहते हैं| सही बात हैं ना?

अच्छा तो फिर क्या आप भी उन 30% लोगों की कहानियों को यहाँ पढ़ना चाहेंगे?

आइये आपको आज पहली बार रुबरु कराते हैं, निशांत से |
पेशे से इंजिनियर, दिल से  लेखक और दिमाग से व्यवसायी | है ना अजूबा ! बड़ी दर्दनाक खानी है भाई की | ३ तरह का रोग एक ही व्यक्ति में हो तो जाहिर है हर कोशिश में कोई कसक रह ही जाती है | यही हाल था बेहाल निशांत का

  अब आगे निशांत की कहानी मेरी जुबानी !

'जब किस्मत में लिखे हों डंडे तो कैसे मिलेंगे अंडे' कुछ यही है मेरा हाल | मैं  निशांत सिंह, आजमगढ़ से | आजमगढ़ नाम तो सुना होगा! हाँ देशी कट्टे चाहिए तो यहाँ आ सकते हैं खुला बाज़ार है | अपने बारे में क्या बताऊ, पहले अपने किस्से की अदाकारा से मिला दूँ, सुनैना जैसा नाम वैसी है बला की खुबसूरत! सोनाक्षी जैसी नक्श नशीली आँखे और कटीली अदा और इनके बाद कहर ढहाने के लिए पारम्परिक परिधान साड़ीआप समझ रहे हैं न | मुझे दो ही चीज़ पसंद है, एक नींद और दूसरी चाय | इन दोनों  के बीच कभी दखलंदाज़ी पसंद नहीं करता लेकिन जब मल्लिकाए हुस्न को देखा था तो मेरी माशूका चाय के दो- चार बूँद छलक गए थे | मुह से तपाक से निकला, 'कसम से!' बाकि जबान में रह गयी क्योकिं पिता जी के साथ बाहर आया था | फिर भी जहाँ तक हो सका मैंने निहार लिया, वो कहते है, फोटो खींच लिया था | कसम से गुरु, मजबूर था नहीं तो आज मैं करीब करीब सिंगल ना होता | अरे यार! गर्लफ्रेंड है, लेकिन समझ का मसला है| छोड़ो उनको बाद में देखूंगा और आप को भी बताऊंगा उनकी कहानी

011 की गर्मी में मेरी निशा का अंत ही नहीं हो रहा था, वो जो फोटो खींची थी ना भरपूर वही बार बार आ रही थी| पहले मेरी चाय और अब नींद कसम से आशिकी ने सब कुछ छीन लिया था | बोर्ड की परीक्षा 10 दिन बाद थी, और अब वो सुनैना | यार पता नही क्यूँ इस स्थिति में मति मारी जाती है | पता नहीं आँख कब लगी, कई बार अलार्म बजा, मैंने कई बार बंद भी किया अंततः शायद मैंने बंद ही कर दिया होगा | पिता जी की आवाज़ से नींद खुली या यूँ कहें नींद अपने आप भाग गयी | घडी में देखा तो 8 बज गए थे

'नवाब साहब का पहला पेपर मैथ्स का है और सो रहे हैं |' पिता जी ने कहा
'रात में देर से सोया होगा' माँ बचाव में कहते हुए चाय की प्याली सिरहाने की मेज पर रख दी | मैं मुस्काराये बिना नहीं रह सका | पिता जी चाय के साथ बगीचे में चले गए और मैं गणित के भूत की तैयारी में जुट गया

एक दिन शाम को टीवी पर 'दगाबाज रे...' गाना आ रहा था और मैं ना चाहते हुए भी हाल में बैठ गया | सोनाक्षी, और फिर सुनैना | यार कसम से लग रहा था कुछ हो गया है और आज फिर बुखार हो गया | अगले दिन मैथ्स था, मैंने जरुरी सवाल हल किये और फिर 30 मिनट पहले कॉलेज के सामने ढाबे पर पहुच गया अपनी टोली पहले से ही वहां थी मेरी टोली में पढाई को हव्वा ना मानने वाले ही थे और पढ़ाकू की तरह आखिरी समय में पन्ने पलटने का काम हमारा नहीं था और चाय के साथ पढाई का कॉम्बिनेशन भी ठीक नही था तो हमने कॉलेज के अच्छे अच्छे फूलों की चर्चा करना शुरू कर दिए, बातों बातों में मैंने भी सोनाक्षी मतलब सुनैना का भी जिक्र किया

'अरे वो तो रिषभ की है भाई!'

 और इतना सुनते ही मेरा पारा चढ़ गया, मेरे हाथ में चाय थी,नहीं तो कसम से उसके मुह पर फेक देता | मैंने इग्नोर करने की कोशिश करते हुए बाहर की बहार को निहारने लगा |

एग्जाम में अभी २० मिनट का वक़्त था तब तक मैं मूड सही करना चाह रहा था सच में यार एक तो मेरी दो जरुरत को भी छीन लिया और अब वो किसी और की थी एग्जाम हो जाये तो सोचूंगा | अगले ही पल, कुछ ऐसा हुआ की सब कुछ भूल गया |

प्रॉपर पटोला में वही मल्लिका ऑटो से गुजरी, मेरा दिल बाग़ बाग़ हो गया | प्रॉपर पटोला तो समझते है ना आप लोग, अरे भाई ' गाना सुनिए 'प्रॉपर पटोला' समझ आ जायेगा |
मैं झटके से उठा और .......


अरे भाई आगे भी है लेकिन आज के लिए इतना ही | आप अपनी राय भेंजे या फिर कहानी बताएं | मैं यानी आपका किस्सागोई अपने शब्दों से सजा कर कहानी को लोगों के बीच रखूँगा |

अपने किस्से आपको फ़ोन पर या फिर Whatsapp पर साझा करना होगा | तो देर किस बात की अभी Inbox करिए Facebook पर |

कमेंट करना ना भूले | निशांत और सुनैना के बीच क्या हुआ ! निशांत की आगे की कहानी क्या है ? लेखक साहब की तीन पर्सनालिटी से कौन सा सफल होगा? सब कुछ पता चलेगा | अपडेट के लिए Facebook पेज से जरुर जुड़िये

1 टिप्पणी:

  1. KAHANI का आगाज जबरदस्त है तीन व्यक्तित्व में समाहित है. जाहिर है जहाँ दिल और दिमाग का खुबसूरत संगम हो तो वहां पेशा खुद ब खुद निखर जाता है. क्योंकि आज कल तो प्यार इश्क और मोहब्बत तो महज झूठ, मतलब और जरुरत की निशानी बन गए हैं क्योंकि ये आजकल दिल से नहीं दिमाग से जो होने लगे हैं.

    खैर निशांत के ज़िन्दगी में मोहब्बत का ऊंट किस करवट बैठेगा यह जानना दिलचस्प होगा ?
    हमें इंतजार होगा निशांत का प्यार नदी के किस धारा की ओर बहेगा ?
    निशांत के इश्क के खुशबु की सुगंध कितना फैलेगा जिसको अपनी साँसों में जीने को चाहेगे....!!!

    #श्याम.

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